Home देश सिद्धारमैया युग का अंत, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

सिद्धारमैया युग का अंत, अब डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान

10
0

 नई दिल्ली

 सालों की राजनीतिक जोड़-तोड़ और सिद्दरमैया के साथ जबरदस्त सत्ता की खींचतान के बाद डीके शिवकुमार आखिरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का अपना बरसों पुराना सपना पूरा करने जा रहे हैं।

वह 3 जून को दोपहर 3.30 बजे लोक भवन के ग्लास हाउस में राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। पार्टी सदस्यों ने बताया कि यह तारीख शिवकुमार के निजी ज्योतिषी बेलूर द्वारकानाथ से सलाह-मशविरा करने के बाद तय की गई।

शाम 4 बजे का निकला शुभ मुहूर्त
ज्योतिष में गहरा विश्वास रखने वाले शिवकुमार को सलाह दी गई थी कि वह उस दिन शाम करीब 4.05 बजे शुरू होने वाले शुभ मुहूर्त में शपथ लें। इस समय को इसलिए भी चुना गया है ताकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस मौके पर मौजूद रह सकें।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई तो बातचीत के आखिरी दौर में प्रियंका ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके की राजनीतिक अहमियत के बावजूद कांग्रेस ने कोई भव्य समारोह न करने का फैसला किया है।

सादा समारोह रखने का क्यों लिया गया फैसला?
राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीसी चंद्रशेखर ने कहा, “हमने शुरू में इस कार्यक्रम को विधान सौध की भव्य सीढ़ियों पर आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 15,000 से 20,000 लोग शामिल होते लेकिन महंगाई और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए हमने ऐसा न करने का फैसला किया।”

उन्होंने आगे कहा, “शिवकुमार ने भी इस बात पर जोर दिया कि यह एक सादा कार्यक्रम होना चाहिए, जो जनसेवा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता हो। चूंकि ये काम-काज वाला दिन है, इसलिए हम जनता को होने वाली किसी भी असुविधा से भी बचना चाहते थे।”

डीके शिवकुमार को चुना गया विधायक दल का नेता
शनिवार को विधान सौध में हुई एक बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। अब सबका ध्यान कैबिनेट गठन पर है। सीएलपी नेता के तौर पर शिवकुमार का चुनाव 17 सालों में नेतृत्व में आया पहला बदलाव है। इस पूरी अवधि में यह पद सिद्दरमैया के पास था।

सीएलपी की बैठक में सिद्दरमैया ने खुद शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी। बाद में कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बैठक के तुरंत बाद शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया।

कैबिनेट गठन पर सभी का ध्यान
अब सभी का ध्यान कैबिनेट गठन पर है। अगर मंगलवार से पहले बातचीत पूरी हो जाती है तो शिवकुमार के साथ कई मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। चंद्रशेखर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कार्यक्रम स्थल पर न जाएं और उन्हें भरोसा दिलाया कि शिवकुमार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता से मिलने के लिए जिलों का दौरा करेंगे।

सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग गुटों को साथ लेते हुए जाति, समुदाय और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 'अहिंदा' सामाजिक गठबंधन फॉर्मूले के तहत कई उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना पर फिर से विचार किया जा रहा है, क्योंकि इस पद के लिए दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है।

नई कैबिनेट में अहम मंत्रालयों को लेकर भी चर्चा चल रही है, जिसमें सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here