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रसोई में भूलकर भी हाथ में न दें रोटी, वास्तु शास्त्र में माना गया है अशुभ

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 वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपरा में रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है. रसोई में बनने वाली पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी कुत्ते की निकालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोटी बनाने और उसे परोसने के भी कुछ खास नियम होते हैं? अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो घर में वास्तु दोष का कारण बनती हैं. इन्हीं में से एक बड़ी गलती है, किसी के हाथ में सीधे रोटी देना. वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी भी किसी व्यक्ति को अपने हाथ से सीधे उसके हाथ में रोटी नहीं देनी चाहिए. बल्कि थाली में रोटी रखनी चाहिए. आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और इससे होने वाले नुकसान.

हाथ में रोटी देना क्यों माना जाता है अशुभ?
1. दरिद्रता और कंगाली को निमंत्रण
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, जब आप किसी व्यक्ति को सीधे हाथ में रोटी थमाते हैं, तो इससे घर की बरकत चली जाती है. ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा और धन की देवी लक्ष्मी नाराज होती हैं, जिससे घर में धीरे-धीरे कंगाली पैर पसारने लगती है.

2. पुण्य कर्मों का क्षय होना
शास्त्रों में माना गया है कि हाथ में रखकर दी गई रोटी भिक्षा (भीख) के समान हो जाती है. यदि आप अपने परिवार के सदस्यों या मेहमानों को इस तरह रोटी देते हैं, तो भोजन कराने का पुण्य समाप्त हो जाता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.

3. रिश्तों में आती है खटास
हाथ में रोटी देने से देने वाले और लेने वाले, दोनों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ने लगते हैं. परिवार के सदस्यों के बीच बेवजह के झगड़े और तनाव की स्थिति पैदा होने लगती है.

क्या है रोटी परोसने का सही तरीका?
यदि आप घर में सुख, समृद्धि और शांति बनाए रखना चाहते हैं, तो रोटी परोसते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें.

थाली या प्लेट का करें इस्तेमाल
 जब भी किसी को रोटी देनी हो, तो उसे हमेशा प्लेट, थाली या रोटिदान (कैसरोल) में रखकर ही आदरपूर्वक परोसें.

सम्मान के साथ दें भोजन
भोजन को हमेशा बैठकर और सम्मान के साथ परोसना चाहिए. जल्दबाजी में या अनादर के भाव से खाना परोसने से भोजन का अपमान होता है.

विशेष वास्तु टिप
रसोई में कभी भी तीन रोटियां एक साथ एक ही थाली में नहीं रखनी चाहिए. तीन संख्या को अशुभ माना जाता है. यदि तीन रोटियां देनी भी हों, तो उन्हें अलग-अलग करके या मोड़कर रखें.

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