Home राज्य 31 अगस्त को भागीदारी भवन में आयोजित होगा ‘विमुक्त जाति दिवस’

31 अगस्त को भागीदारी भवन में आयोजित होगा ‘विमुक्त जाति दिवस’

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– सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश में सामाजिक समावेश को बढ़ावा दे रही राज्य सरकार

– विमुक्त जातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित कर रही है योगी सरकार

लखनऊ,

योगी सरकार समाज के हाशिए पर रहे विमुक्त जाति समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में 31 अगस्त को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में ‘विमुक्त जाति दिवस’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से विमुक्त जाति समुदाय के लोग हिस्सा लेंगे, जो सामाजिक समावेश और सशक्तीकरण का प्रतीक होगा। ‘विमुक्त जाति दिवस’ का ऐतिहासिक महत्व है। 31 अगस्त 1952 को भारत सरकार ने अंग्रेजों द्वारा थोपे गए काले कानून ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ को समाप्त किया था, जिसने कई समुदायों को अपराधी घोषित कर उनके अधिकार छीन लिए थे।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार इस दिन को ‘विमुक्त जाति दिवस’ के रूप में मनाकर इन समुदायों को सम्मान और नई पहचान दे रही है। योगी सरकार विमुक्त जातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित कर रही है। इसके तहत विमुक्त जाति के लोगों को पट्टे पर भूमि आवंटन की सुविधा भी प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने विमुक्त जातियों के लिए समावेशी विकास को प्राथमिकता दी है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं इन समुदायों को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और आवासीय योजनाओं के माध्यम से इनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि विमुक्त जाति के लोग समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और उनके बच्चे उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बनाएं।

यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा, बल्कि विमुक्त जातियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगा। योगी सरकार की यह पहल विमुक्त जाति समुदाय के लिए नई आशा और अवसरों का प्रतीक है, जो उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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