हैदराबाद
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को अपनी कैबिनेट सहयोगी कोंडा सुरेखा को तुरंत प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया। यह कदम महिला नेता की बेटी द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद उठाया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस बारे में गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला को सिफारिश की गई है। राज्य की वन और बंदोबस्त मंत्री सुरेखा विवादों में घिर गई हैं। उनकी बेटी ने मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी, जिस पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
पिछले कुछ दिनों में चला था बैठकों का दौर
सुरेखा को हटाने के अलावा, मुख्यमंत्री ने जी. चिन्ना रेड्डी की राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को भी तुरंत प्रभाव से रद कर दिया। ये घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, उनके डिप्टी मल्लू भट्टी विक्रमार्क और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ की एआईसीसी नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आए।
कांग्रेस की राज्य इकाई की अनुशासनात्मक समिति ने पहले ही पार्टी नेतृत्व से सुरेखा और चिन्ना रेड्डी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। सुरेखा ने राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी मामलों की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से भी मुलाकात की थी और उनके सामने अपना पक्ष रखा था।
कोंडा सुरेखा का मंत्री पद छिनने से इनकार
उधर, कोंडा सुरेखा ने कैबिनेट से हटाने की खबरों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सुरेखा ने CNN-News18 से बातचीत में कहा, "मुझे अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। न कोई हस्ताक्षर, न लेटर पैड, सिर्फ़ सादा कागज़। मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। मुझे कोई सूचना नहीं दी गई।" उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि यह सही तरीका नहीं है।
पहले पार्टी को हमारी बात सुननी चाहिए थी
सुरेखा ने कहा कि उन्होंने पार्टी द्वारा जारी 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) का जवाब दे दिया था। उनका कहना है कि बेटी की टिप्पणी के मामले में उनके पक्ष पर ठीक से विचार नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा, "पार्टी की ओर से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया।" सुरेखा ने फैसले की जानकारी देने वाले संदेश की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसमें न तो हस्ताक्षर थे और न ही आधिकारिक लेटरहेड। उन्होंने तर्क दिया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पहले पार्टी को उनकी बात सुननी चाहिए थी।
अगला कदम क्या?
कोंडा सुरेखा ने कहा कि वह अधिकारियों से औपचारिक पुष्टि मिलने के बाद ही आगे का कदम तय करेंगी। उन्होंने कहा, "आधिकारिक पुष्टि मिलने के बाद, मैं आगे की कार्रवाई तय करूंगी।" विवाद से जुड़े आरोपों पर सुरेखा ने कहा, "मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया और न ही कोई टिप्पणी की।" इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने सुरेखा के मामले पर विचार किया था। बता दें कि सुरेखा को हटाने का फैसला तब लिया गया, जब तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने उनकी बेटी की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पार्टी के अन्य नेताओं पर की गई टिप्पणियों के लिए जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर उनके जवाब की समीक्षा की।
सुरेखा के बयान से पार्टी नेता असहमत
सुरेखा को बर्खास्त करने का फैसला राज्य कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश के बाद लिया गया है। इससे पहले करीब 20 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने कहा था कि वे सुरेखा के इस बयान से असहमत हैं कि उनकी बेटी की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 19 अगस्त को कोंडा सुरेखा को नोटिस जारी कर उनकी बेटी सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के संबंध में तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा था। सुरेखा ने 20 अगस्त को दिए अपने जवाब में कहा था कि उनकी बेटी द्वारा की गई टिप्पणियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटी की टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सुरेखा की बेटी ने क्या कहा था?
कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने वारंगल में एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री टीडीपी (TDP) और बीआरएस (BRS) से आए नेताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, पुराने कांग्रेस वफादारों और उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने परकल निर्वाचन क्षेत्र से अगला विधानसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा की थी।
सुरेखा ने किया था कैबिनेट में बने रहने का आग्रह
सुरेखा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें कैबिनेट में बने रहने देने का आग्रह किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मंत्री के तौर पर उनका काम अच्छा रहा है और उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है।
मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के खिलाफ अपनी बेटी की टिप्पणियों की निंदा न करने के कारण कई कांग्रेस विधायकों द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग का जिक्र करते हुए सुरेखा ने कहा कि कोई भी विधायक अपनी मर्जी से नहीं बोला और उनके पीछे कोई था।
सुरेखा ने जताई आपत्ति
जब उनसे पूछा गया कि विधायकों के पीछे कौन था तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे विवाद पैदा होगा। उन्होंने उन विधायकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जिन्होंने उनके खिलाफ बात की थी। सुरेखा ने अनुशासनात्मक समिति द्वारा उन्हें भेजे गए नोटिस पर आपत्ति जताई।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे शीर्ष नेताओं को ईमेल भेजे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी बेटी की टिप्पणियों का समर्थन करती हैं तो सुरेखा ने जवाब दिया कि उनकी बेटी स्वतंत्र है और उन टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
चिन्ना रेड्डी पर भी हुई कार्रवाई
सुरेखा के अलावा, राज्य कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने चिन्ना रेड्डी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की थी, जिन्होंने पार्टी विधायक टुडी मेघा रेड्डी की आलोचना की थी। राज्य योजना बोर्ड में चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति रद होने के बाद सरकार ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष गडवाल विजयलक्ष्मी को योजना बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया।
कांग्रेस नेता नेरेला शारदा महिला आयोग की अध्यक्ष हैं। एक अन्य नियुक्ति में पूर्व सांसद जी. सुधा रानी को वारंगल के काकतीय शहरी विकास बोर्ड (KUDA) का अध्यक्ष बनाया गया है।







