भोपाल
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 35 गांवों के आदिवासी इकट्ठा होकर भोपाल आ रहे हैं। वे यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलेंगे। उन्हें वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में बताएंगे। वे कब्जे की जमीन के दस्तावेज भी दिखाएंगे।
वन विभाग ने पिछले दिनों सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए थे। कुएं को मिट्टी से भर दिया था।इसके बाद शिवराज सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे थे। वन विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ धरना भी दिया था।
अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाए, कार्रवाई करें
गांव में तीन दिन से आंदोलन चल रहा है। इसमें शामिल रमेश बारेला ने बताया कि धरने का तीसरा दिन है। उनकी प्रमुख मांग है कि कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
वर्षों से जिस जमीन पर कुआं बनाकर खेती कर रहे थे, उस जमीन का वैध अधिकार यानी पट्टा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के रहने, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करने के साथ फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।बारेला ने कहा कि आदिवासी परिवार बाहर से आकर नहीं बसे। उसी वन क्षेत्र में रहते आए हैं, जहां उनके पूर्वज रहते थे। जंगल से उनकी आजीविका जुड़ी है। मकान टूटने से 12 परिवार बेघर हो गए हैं।
35 से अधिक गांवों में खेती रोकने का आरोप
आदिवासी समाज का आरोप है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
समाज ने इटावा खुर्द, जामुल झील पानी, पांगरी, छापरी, कोसमी, सनकोटा, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर, लावापानी, बोरपानी, डोंगला पानी, बेड़ापानी, सिराली, बावड़ी खेड़ा, अमीरगंज, सुरई, खजूरी, आमाझिर, चतरकोटा, ठीकरी खेड़ा, यारनगर, मथार, भूरीटेक कावड़, ढाबा, पाट तलाई, भिलाई, मोगरा खेड़ा, भूराखेड़ा, सेवनिया, मंजाखेड़ी छाप, मोगली भुराट, गाडरीपुरा, झोलियापुरा और बीलपाटी समेत कई गांवों का उल्लेख किया है।
खिवनी से विदिशा तक बेदखली की शिकायतें
आदिवासी समाज ने खिवनी अभयारण्य, बुधनी के यार नगर और कोसमी के अलावा विदिशा जिले के ग्यारसपुर, मेहंदीपुर, डगरवाड़ा, बदनपुर, शमशाबाद, लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं।
समाज का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यार नगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। वहीं विदिशा के ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है।आदिवासी समाज ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, पुराने पट्टों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों के परीक्षण तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है।रमेश बारेला ने स्पष्ट किया कि कृषि मंत्री के पदयात्रा में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक, आदिवासी समाज के लोग ही पदयात्रा करेंगे।
प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कब्जे अवैध बताए
दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने गलत तरीके से वन भूमि पर कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे जिलों से आए लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर सागौन के पौधे काटे और खेती के लिए झोपड़ियां बनाईं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी।वर्ष 2021 में निगम ने इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया गया।
गूगल अर्थ की तस्वीरों को बनाया आधार
जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइम लाइन तस्वीरों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 तक संबंधित वन भूमि खाली दिखाई दे रही थी, जबकि वर्ष 2022 से वहां झोपड़ियां बनाकर खेती के लिए कब्जा किए जाने के संकेत मिले। रिपोर्ट में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों का उल्लेख है।
भैंरोंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान बेदखल किए गए सभी 9 कब्जा धारियों के मूल गांव सिंधपुर और हल्लीबन नगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आईडी कार्ड दर्ज हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान 9 झोपड़ियां हटाकर संबंधित जमीन को मलबे से भर दिया गया। पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी भी कराई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भैंरोंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र में कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 की 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।
कार्रवाई के विरोध में वन विकास निगम के डिपो के बाहर तीन दिन से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। अब आदिवासी समाज मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए भोपाल कूच की तैयारी में है।







