उद्यमिता, रोजगार, कौशल विकास और आजीविका में महिलाओं की भागीदारी का जिलावार मूल्यांकन
45 संकेतकों में 27 पर सकारात्मक रुझान, एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सुधार
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को अब आंकड़ों के आधार पर परखा जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार के नियोजन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स 2.0 तैयार किया है। इसके माध्यम से महिलाओं की उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा एवं कौशल विकास, आजीविका, सुरक्षा और आवागमन से जुड़ी सुविधाओं में भागीदारी का जिलावार आकलन किया जा रहा है।
योगी सरकार की पहल पर तैयार इस इंडेक्स का उद्देश्य केवल योजनाओं के क्रियान्वयन का आंकड़ा जुटाना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि उनका लाभ महिलाओं तक किस स्तर तक पहुंच रहा है। इसके लिए 15 विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर 49 संकेतक निर्धारित किए गए हैं। इनमें महिलाओं की भागीदारी से संबंधित योजनाओं के परिणामों को प्रमुखता दी गई है।
महिलाओं की भागीदारी का लक्ष्य 30 प्रतिशत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2025 को वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स के पहले संस्करण की समीक्षा के दौरान सभी विभागीय योजनाओं में महिलाओं की 30 प्रतिशत भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही सबसे निचले प्रदर्शन वाले पांच जिलों पर विशेष अभियान चलाने और सभी विभागों को जेंडर एक्शन प्लान तैयार कर लागू करने को कहा था। इसी दिशा में इंडेक्स के दूसरे संस्करण में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
पांच प्रमुख क्षेत्रों में हो रहा मूल्यांकन
वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स में महिला आर्थिक सशक्तीकरण को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें शिक्षा एवं कौशल विकास को 22.4 प्रतिशत, उद्यमिता को 22.1 प्रतिशत, रोजगार को 21.9 प्रतिशत, आजीविका को 17.4 प्रतिशत तथा आवागमन, सुरक्षा एवं समावेशी बुनियादी ढांचे को 16.1 प्रतिशत वेटेज दिया गया है। इसके अंतर्गत ओडीओपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम स्वनिधि, स्वयं सहायता समूहों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, रोजगार मेलों और अन्य योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी का आकलन किया जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों और उद्यमिता में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने के लक्ष्य की उपलब्धि में महिलाओं की भागीदारी वित्तीय वर्ष 2023-24 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 65.3 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अनुपात भी 24.9 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत पहुंचा है। एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत महिला उद्यमियों की संख्या 2023-24 के 1.87 लाख से बढ़कर 2025-26 में 2.90 लाख हो गई। ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी 58.2 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत तथा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 63.3 प्रतिशत हो गई।
स्ट्रीट वेंडर्स के डिजिटल सशक्तीकरण में भी प्रगति
पीएम स्वनिधि योजना के तहत महिला स्ट्रीट वेंडर्स की डिजिटल भागीदारी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में महिला लाभार्थियों में 54 प्रतिशत डिजिटल रूप से सक्रिय थीं, जो 2025-26 में बढ़कर 69 प्रतिशत हो गईं। वहीं तीसरी किस्त का ऋण प्राप्त करने वाली महिला लाभार्थियों का अनुपात 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत पहुंचा है।
27 संकेतकों में सकारात्मक रुझान
इंडेक्स में शामिल 45 संकेतकों के रुझानों के विश्लेषण में 27 में सकारात्मक प्रगति, 15 में नकारात्मक रुझान और तीन में स्थिति स्थिर पाई गई। एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। शहरी विकास विभाग के तीनों और संस्थागत वित्त विभाग के दोनों संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति सामने आई है।
जिलावार समीक्षा और जवाबदेही पर जोर
वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स के माध्यम से जिलों के प्रदर्शन की तुलना कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, नियोजन विभाग के प्लेटफॉर्म पर डैशबोर्ड और क्षेत्रवार जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। परिवहन और व्यावसायिक शिक्षा के लिए क्षेत्र-विशिष्ट कार्ययोजनाएं भी विकसित की गई हैं। योगी सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने के साथ-साथ उन्हें रोजगार, उद्यमिता, कौशल और आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है। जिलावार आंकड़ों के नियमित विश्लेषण से योजनाओं की कमियों को चिह्नित कर सुधारात्मक कदम उठाने का आधार तैयार किया जा रहा है।







